स्वामी विवेकानंद के दोहे | रामसनेही शर्मा ‘यायावर’ के द्वारा स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखे गए दोहे।

इस पोस्ट में हम रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ लिखी गयी स्वामी विवेकानंद के दोहे (vivekanand ke dohe) को प्रस्तुत किये हे। इस अद्भुत स्वामी विवेकानंद के दोहे को आप पड़के आप स्वामी विवेकानंद जी के बारे में आसानी से जान सकते हे। स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखी गयी दोहे इस संसार में विवेकानंद जी के प्रमुख्याता कितनी तीइसकी खुलासा कर देती हे।

( रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ कवी के बारे में विकिपीडिया से पढ़िए )

स्वामी विवेकानंद के दोहे

उठो, जगो, आगे बढ़ो, पाओ जीवन-साध्य।
तुमने कहा कि राष्ट्र ही, एकमेव आराध्य।।

साँस-साँस में राष्ट्रहित, शब्द-शब्द में ज्ञान।
राष्ट्रवेदिका पर किए, अर्पित तन मन प्राण।।

सत्य और संस्कृति हुए, पाकर तुम्हें महान।
कदम मिलाकर चल पड़े, धर्म और विज्ञान।।

देव संस्कृति का किया, तप-तप कर उत्थान।
करता है दिककाल भी, ॠषि तेरा जयगान।।

अनथक यात्री ने कभी, लिया नहीं विश्राम।
दिशा-दिशा के वक्ष पर, लिखा तुम्हारा नाम।।

रोम-रोम पुलकित हुआ, गाकर दिव्य चरित्र।
जन्म तुम्हें देकर हुई, भारत भूमि पवित्र।।

संत विवेकानंद तुम, शुभ-संस्कृति का कोष।
गुँजा दिया इस सृष्टि में, भारत का जय घोष।।

इस पोस्ट को पढ़िए – स्वामी विवेकानंद जीवनी हिंदी में। Swami Vivekananda Biography In Hindi

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स्वामी विवेकानंद के दोहे
स्वामी विवेकानंद के दोहे

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